योगी जी के यूपी में साइबर अपराध के जाल में फंसा परिवार! ग्रेटर नोएडा वेस्ट में अपने ही फ्लैट में कैद जैसी जिंदगी जीने को मजबूर, आखिर कौन कर रहा है परेशान?

अरिहंत आर्डेन की पूजा सिन्हा का आरोप, दो महीने से फर्जी ऑनलाइन ऑर्डर, संदिग्ध बुकिंग और डिलीवरी एजेंटों के आने से परिवार परेशान; बिसरख साइबर सेल ने संबंधित प्लेटफॉर्म को ईमेल भेजने की बात कही

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ग्रेटर नोएडा वेस्ट: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित अरिहंत आर्डेन सोसायटी में रहने वाला एक परिवार कथित साइबर पहचान धोखाधड़ी और अनधिकृत ऑनलाइन ऑर्डर से परेशान है। पूजा सिन्हा का आरोप है कि करीब दो महीने से उनके परिवार के मोबाइल नंबरों और निजी जानकारियों का कथित तौर पर दुरुपयोग कर ऑनलाइन ऑर्डर और बुकिंग की जा रही हैं। बार-बार डिलीवरी एजेंटों के घर पहुंचने, संदिग्ध कॉल आने और परिवार के मना करने पर कथित बहस होने से उनकी दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई है। पूजा के दो बच्चे हैं, जिनकी उम्र 5और 13 साल है। वह अपने बुजुर्ग ससुर की देखभाल भी करती हैं, जो डायलिसिस के मरीज हैं। पूजा को अब अपने बच्चों और परिवार की सुरक्षा की चिंता सता रही है।

इस मामले में बिसरख साइबर सेल प्रभारी अशिष सिंह ने बताया कि पुलिस संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से संपर्क कर रही है। उन्होंने कहा, “हम इस मामले पर काम कर रहे हैं। परिवार को परेशान करने वाले सभी पोर्टलों को ईमेल भेजे गए हैं। हम जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने की कोशिश कर रहे हैं। हम पीड़ित परिवार के साथ हैं और इस पूरे मामले के पीछे जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ संभव कार्रवाई की जाएगी।”

हालांकि, परिवार का कहना है कि शिकायत देने के बाद भी कथित घटनाएं रुक नहीं पाई हैं और वे अब तक यह नहीं समझ पाए हैं कि उनके साथ ऐसा क्यों हो रहा है और इसके पीछे कौन है।

‘पहले लगा अपने आप ठीक हो जाएगा, फिर समझ आया कि मामला गंभीर है’

पूजा सिन्हा का कहना है कि शुरुआत में उन्हें समझ नहीं आया कि बार-बार आ रहे ऑर्डर और कॉल किसी सुनियोजित साइबर धोखाधड़ी का हिस्सा हो सकते हैं। उन्हें लगा कि कुछ समय बाद समस्या अपने आप खत्म हो जाएगी। लेकिन जब करीब डेढ़ महीने तक कोई राहत नहीं मिली, तो उन्होंने वीडियो संदेश के जरिए अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाने का फैसला किया।

पूजा के अनुसार, उन्होंने 9 अक्टूबर 2026 को बिसरख पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दी थी। उनका कहना है कि शिकायत देने के 14 दिन बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार के मोबाइल नंबरों और निजी जानकारियों का इस्तेमाल उनकी जानकारी या सहमति के बिना ऑनलाइन ऑर्डर और बुकिंग करने के लिए किया जा रहा है।

पूजा चाहती हैं कि पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच करे और पता लगाए कि उनके परिवार की निजी जानकारी तक कौन पहुंच रहा है। उनका कहना है कि जब तक इस गतिविधि के पीछे मौजूद लोगों की पहचान नहीं होती, तब तक परिवार के लिए सामान्य जीवन जीना मुश्किल बना रहेगा।

नोएडा से बाहर गए तो वहां भी शुरू हो गए कथित फर्जी ऑर्डर

पूजा की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि उनके मुताबिक यह मामला केवल उनके घर तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों के दौरान जब उनका परिवार नोएडा से बाहर गया, तो जिन जगहों पर वे ठहरे थे, वहां भी कथित तौर पर इसी तरह की गतिविधियां शुरू हो गईं।

पूजा का आरोप है कि जिन लोगों के यहां उनका परिवार गया था, उनके मोबाइल नंबरों का भी इस्तेमाल होना शुरू हो गया और उन स्थानों के पते पर भी ऑर्डर संबंधी गतिविधियां सामने आईं। परिवार का कहना है कि इस घटनाक्रम ने उनकी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि अब उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि उनकी जानकारी किस तरह अलग-अलग जगहों तक पहुंच रही है।

परिवार ने पहले बताया था कि 8 अगस्त से 17 अगस्त 2026 के बीच नोएडा से पटना की यात्रा के दौरान भी ऑर्डर और डिलीवरी से संबंधित सूचनाएं आने लगी थीं। पूजा का कहना है कि उनके परिवार ने ये ऑर्डर नहीं किए थे। उन्होंने पुलिस से नोएडा और पटना से संबंधित बुकिंग रिकॉर्ड की जांच करने की मांग की है, ताकि पता चल सके कि ऑर्डर किस मोबाइल नंबर, खाते या डिवाइस से किए गए।

दरवाजे पर खड़े हो जाते हैं करीब 20 डिलीवरी एजेंट, ओटीपी नहीं देने पर कथित विवाद

पूजा का आरोप है कि उनके फ्लैट के दरवाजे पर कई बार करीब 20 डिलीवरी एजेंट तक पहुंच जाते हैं। वे ऐसे ऑर्डर लेकर आते हैं, जिन्हें परिवार का कहना है कि उसने किया ही नहीं। पूजा के मुताबिक, यह समस्या करीब ढाई महीने से जारी है।

उनका कहना है कि जब परिवार ऑर्डर लेने से मना करता है या डिलीवरी पूरी करने के लिए ओटीपी देने से इनकार करता है, तो कुछ डिलीवरी एजेंटों के साथ बहस हो जाती है। इससे घर के बाहर बार-बार तनावपूर्ण स्थिति बनती है।

पूजा का दावा है कि कुछ ऑर्डर 10 हजार से 20 हजार रुपये तक के होते हैं। उनके अनुसार, इन गतिविधियों में Myntra, Blinkit, Ozi, Meesho और Nykaa जैसे प्लेटफॉर्म के ऑर्डर भी शामिल हैं। परिवार का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में अनचाहे ऑर्डर आने से उन्हें आर्थिक नुकसान और सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।

पूजा ने सोसायटी के सुरक्षा प्रभारी से भी शिकायत की और अनुरोध किया कि ऐसे संदिग्ध ऑर्डर लेकर आने वाले डिलीवरी एजेंटों के प्रवेश को लेकर सख्ती बरती जाए। हालांकि, उनका आरोप है कि इसके बावजूद डिलीवरी एजेंट उनके फ्लैट तक पहुंच रहे हैं।

सोसायटी के गार्ड भी चिंतित, फर्जी एंट्री कर फ्लैट तक पहुंचने का आरोप

पूजा के मुताबिक, सोसायटी के सुरक्षा गार्ड भी इन घटनाओं को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि गार्ड हर डिलीवरी एजेंट को रोकने की कोशिश नहीं कर पाते और कुछ एजेंट कथित तौर पर विजिटर रजिस्टर में गलत जानकारी दर्ज कर सोसायटी में प्रवेश कर लेते हैं।

पूजा का आरोप है कि इस तरह प्रवेश करने के बाद कुछ डिलीवरी एजेंट उनके दरवाजे तक पहुंच जाते हैं। इससे सोसायटी की सुरक्षा व्यवस्था और विजिटर वेरिफिकेशन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

परिवार की चिंता केवल अनचाहे सामान की डिलीवरी तक सीमित नहीं है। पूजा को डर है कि अगर कोई व्यक्ति उनके परिवार के मोबाइल नंबरों, पते और अन्य निजी जानकारियों तक पहुंच बना सकता है, तो उसे उनके आने-जाने और दिनचर्या के बारे में भी जानकारी हो सकती है।

परिवार चाहता है कि पुलिस और सोसायटी प्रबंधन इस बात की जांच करें कि संदिग्ध एंट्री कैसे हो रही हैं और सुरक्षा जांच को किस तरह प्रभावी बनाया जा सकता है।

अमेजन पे से पैसे कटने और संदिग्ध बुकिंग का भी आरोप

पूजा ने आरोप लगाया है कि मामला केवल ई-कॉमर्स ऑर्डर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संदिग्ध बुकिंग और भुगतान से जुड़ी घटनाएं भी शामिल हैं।

उनकी शिकायत में Amazon, Flipkart, Blinkit, Ozi, Myntra, Little Joy, FirstCry, Meesho, Nykaa, Zomato, Barbeque Nation, Zoomcar, Uber, Ola, Rapido और Savaari समेत कई प्लेटफॉर्म के नाम शामिल हैं।

पूजा के मुताबिक, Zoomcar और Savaari से संबंधित बुकिंग के बारे में भी कॉल आए। उन्होंने बताया कि कुछ कॉल में नोएडा से यमुनोत्री और बदरीनाथ जैसे स्थानों तक यात्रा करने के बारे में पूछा गया, जबकि परिवार का दावा है कि उसने ऐसी बुकिंग नहीं की थी।

उन्होंने अमेजन ऑर्डर से संबंधित एक घटना में अपने Amazon Pay बैलेंस से कथित तौर पर पैसे कटने की भी शिकायत की है। इसके अलावा, पूजा ने Savaari ऐप के माध्यम से यूपीआई भुगतान करने की कथित कोशिश का जिक्र किया, जो सफल नहीं हुई।

पूजा का यह भी आरोप है कि कुछ अमेज़न ऑर्डर को डिलीवर दिखा दिया गया, जबकि परिवार को सामान मिला ही नहीं। उनका कहना है कि कुछ मौकों पर बिना ऑर्डर किए सामान पहुंचा, जबकि कुछ मामलों में सामान नहीं मिलने के बावजूद डिलीवरी का रिकॉर्ड दर्ज हो गया।

उन्होंने पुलिस से ऑर्डर आईडी, भुगतान रिकॉर्ड, डिलीवरी विवरण और संबंधित खातों व डिवाइस की तकनीकी जानकारी की जांच करने की मांग की है।

सिम और मोबाइल बदलने के बाद भी नहीं रुकी कथित गतिविधि

पूजा ने बताया कि समस्या से छुटकारा पाने के लिए उन्होंने अपनी सिम बदलकर नया मोबाइल नंबर इस्तेमाल करना शुरू किया। लेकिन उनका आरोप है कि नया नंबर सक्रिय होने के बाद भी कॉल और बुकिंग से संबंधित परेशानियां दोबारा शुरू हो गईं। उन्होंने अपना मोबाइल हैंडसेट भी बदल लिया और नए फोन का इस्तेमाल शुरू किया, लेकिन उनके मुताबिक इससे भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। पूजा का कहना है कि अब इस मामले में तकनीकी जांच जरूरी है, ताकि पता लगाया जा सके कि कॉल और बुकिंग कैसे हो रही हैं और कहीं उनके ऑनलाइन खातों या निजी जानकारी का दुरुपयोग तो नहीं किया जा रहा। उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी मामले की शिकायत करने और संबंधित प्लेटफॉर्म से मदद मांगने की बात कही है।

बच्चों और डायलिसिस पर जाने वाले ससुर की सुरक्षा की चिंता

पूजा सिन्हा का कहना है कि इन घटनाओं ने उनके पूरे परिवार को मानसिक रूप से परेशान कर दिया है। गृहिणी होने के साथ-साथ वह अपने पाँच और 13 साल के बेटों की देखभाल करती है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर अब वह पहले से ज्यादा चिंतित रहती हैं।

वह बच्चों को स्कूल बस स्टॉप तक छोड़ने और लेने जाती हैं, लेकिन जब बच्चे सोसायटी के नीचे खेलने जाते हैं या इधर-उधर घूमते हैं, तो उन्हें डर लगा रहता है। उनका कहना है कि जब तक यह पता नहीं चलता कि कथित गतिविधियों के पीछे कौन है और परिवार की जानकारी का इस्तेमाल कैसे हो रहा है, तब तक वह निश्चिंत नहीं हो पा रही हैं।

उनकी चिंता अपने बुजुर्ग ससुर को लेकर भी है, जो डायलिसिस के मरीज हैं और इलाज के लिए अकेले जाते हैं। पूजा को आशंका है कि उनके परिवार की इतनी निजी जानकारी तक पहुंच रखने वाला व्यक्ति उन्हें पहचानता भी हो सकता है।

पूजा ने कहा, “मुझे अपने बच्चों और ससुर जी की सुरक्षा की चिंता है। मेरे ससुर जी डायलिसिस के लिए अकेले जाते हैं। जो हमारी इतनी सारी जानकारी निकाल सकता है, क्या पता वह हमें पहचानता भी हो। मैं चाहती हूं कि पता चले कि यह सब कौन कर रहा है।”

उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है। बच्चों की देखभाल और ससुर की जिम्मेदारी के बीच लगातार बनी अनिश्चितता ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है।

“मैं न्याय चाहती हूं। मुझे नहीं लगता कि किसी भी परिवार को इस तरह की घटनाओं से गुजरना चाहिए”

पूजा
परिवार की मांग, आरोपियों की पहचान कर रोकी जाए कथित गतिविधि

पूजा ने पुलिस से परिवार के मोबाइल नंबरों, ऑनलाइन खातों, आवासीय पते और भुगतान माध्यमों के कथित दुरुपयोग की विस्तृत जांच करने की मांग की है। उन्होंने संबंधित प्लेटफॉर्म से बुकिंग हिस्ट्री, ऑर्डर आईडी, डिलीवरी पते, भुगतान रिकॉर्ड और उपलब्ध तकनीकी जानकारी जुटाने का अनुरोध किया है।

उन्होंने सोसायटी के सीसीटीवी फुटेज और विजिटर एंट्री रिकॉर्ड की भी जांच करने की मांग की है, जहां ये उपलब्ध हों। पूजा का कहना है कि वह ऑर्डर के स्क्रीनशॉट, Amazon Pay से संबंधित विवरण, कस्टमर केयर से हुई बातचीत, एसएमएस, व्हाट्सऐप संदेश, कॉल लॉग और डिलीवरी नोटिफिकेशन जैसे साक्ष्य उपलब्ध करा सकती हैं।

बिसरख साइबर सेल के बयान के अनुसार, संबंधित प्लेटफॉर्म को ईमेल भेजे गए हैं और मामले को जल्द सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, जांच में अब तक क्या सामने आया है, किसी संदिग्ध की पहचान हुई है या आगे क्या कार्रवाई की गई है, इसकी जानकारी खबर लिखे जाने तक उपलब्ध नहीं थी।

पूजा के लिए फिलहाल सबसे जरूरी है कि कथित गतिविधियां रुकें, इसके पीछे मौजूद लोगों की पहचान हो और उनके परिवार को सुरक्षा का भरोसा मिले। उनका कहना है कि जब तक इस पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक अपने ही घर में भी परिवार का डर खत्म नहीं हो पा रहा है।

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