हम प्रायः जीवन से परिणाम माँगते हैं, लेकिन अपने भीतर उस परिणाम को धारण करने की क्षमता विकसित नहीं करना चाहते। जपमाला केवल मंत्रों की गणना का साधन नहीं; उसे प्रतीकात्मक रूप से देखें तो वह मन को बार-बार एक ही केंद्र पर वापस लाने का माध्यम भी है।
मन बार-बार भटकेगा।
विचार आएँगे।
आकर्षण आएँगे।
भय आएगा।
संशय आएगा।
थकान आएगी।
लेकिन साधना का अर्थ यह नहीं कि मन कभी भटके ही नहीं।