नवरात्रि का दूसरा दिन: ब्रह्मचारिणी — संकल्प की अग्नि में संभावना का परिष्कार
हम प्रायः जीवन से परिणाम माँगते हैं, लेकिन अपने भीतर उस परिणाम को धारण करने की क्षमता विकसित नहीं करना चाहते। जपमाला केवल मंत्रों की गणना का साधन नहीं; उसे प्रतीकात्मक रूप से देखें तो वह मन को बार-बार एक ही केंद्र पर वापस लाने का माध्यम भी है।
मन बार-बार भटकेगा।
विचार आएँगे।
आकर्षण आएँगे।
भय आएगा।
संशय आएगा।
थकान आएगी।
लेकिन साधना का अर्थ यह नहीं कि मन कभी भटके ही नहीं।
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